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Friday, 1 May 2015

मूंग दाल चावल मसाला डोसा(Moong dal chaval masala dosa )










सामग्री :



डोसे के लिए :

धुली मूँग दाल - 1 कप 
चावल - 1/2 कप 
हरी मिर्च - 2 
अदरक (बारीक़ कटा )-2 टेबलस्पून 
नमक स्वादानुसार 
तेल डोसे सेकने के लिए 



भरने के लिए :

आलू ( उबला और टुकड़े में कटे )- 2 बड़े 
शिमला मिर्च (बारीक़ कटी )- 1/4 कप 
हरी मटर (उबली )- 1/2 कप 
प्याज (बारीक़ कटा )- 1 बड़ा 
हरी मिर्च (बारीक़ कटी )- 2 
गरम मसाला पाउडर - 1/2 छोटी चम्मच 
हल्दी पाउडर - 1/2 छोटी चम्मच 
धनिया पाउडर - 1 छोटी चम्मच 
नीबू का रस - 1टेबलस्पून 
राई - 1 छोटी चम्मच 
हरा धनिया (बारीक़ कटा )- 2 टेबलस्पून 
नमक स्वादानुसार 
तेल - 2 टेबलस्पून 



विधि :

1)- दाल और चावल को धोकर पानी में चार से पाँच घंटे के लिए भिगो दें। 
2)- दाल और चावल से पानी निकाल दें अदरक,हरी मिर्च और आधा कप पानी के साथ मिक्सर में बारीक़ पीस लें। घोल में नमक मिला लें। अगर घोल बहुत ज्यादा गाढ़ा हैं तो थोड़ा पानी मिला लें। अलग रख दें। 
3)- एक पैन में तेल गरम करें उसमें राई और करी पत्ता डालें और राई के चटकने के बाद उसमें प्याज और हरी मिर्च डालकर दो मिनट तक भूने। आलू,शिमला मिर्च और मटर डालकर अच्छी तरह चलाएं। हल्दी पाउडर,गरम मसाला पाउडर,नमक और नीबू का रस डालकर अच्छी तरह 
से मिलाएँ और एक मिनट तक भूने। ढक्क्न लगाकर मध्यम आँच पर दो मिनट तक पकाएँ। आँच बंद कर दें अलग रख दें। 









4)- नॉन स्टिक तवा गरम करें उसमें थोड़े पानी के छीटें देकर उसको कपड़े से पोंछ दें। तवे पर एक बड़े चम्मचे या कटोरी से घोल डालें और उसे चम्मचे से बढ़ाते हुए गोलाई में फैलाए।डोसे के किनारे पर चम्मच से तेल डालें।डोसे के बीच में दो बड़ा चम्मच आलू मसाला फैलाए और डोसे को एक मिनट तक ब्राउन होने तक सेकें अब डोसे को रोल कर दें। मूंग दाल चावल मसाला डोसा तैयार हैं। 



















5)- गरमागरम डोसा अपनी पसन्द की किसी भी चटनी के साथ परोसे। 














Monday, 27 April 2015

मिनी पिज्जा ( Mini Pizza )








सामग्री :


रेडीमेड मिनी पिज्जा - 8 से  10 


सॉस के लिए :




लहुसन ( बारीक़ कटा )- 1 छोटी चम्मच 
पिसा टमाटर - 4 टेबलस्पून
टोमैटो कैचअप - 2 टेबलस्पून
अजवायन - 1/2 छोटी चम्मच
लाल मिर्च पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच
गरम मसाला पाउडर - 1/2 छोटी चम्मच
नमक - 1/2 छोटी चम्मच
चीनी - 1 छोटी चम्मच
तेल - 1 छोटी चम्मच




टॉपिंग के लिए :



चीज़ ( कसा हुआ )- 1/2 कप 
प्याज ( बारीक़ कटा )- 1 छोटा 
शिमला मिर्च ( बारीक़ कटा )- 1/4 



विधि :




1)- एक पैन में तेल गरम करें। उसमें अजवायन डालकर 10 सेकेण्ड तक पकाएँ अब उसमें लहसुन डालकर एक मिनट तक पकाएँ। अब उसमें पिसा टमाटर,गरम मसाला पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, टोमैटो कैचअप, चीनी और नमक डालकर दो मिनट तक पकाएँ। आँच बंद कर दें। ठण्डा होने दें। प्याज और शिमला मिर्च में थोड़ा नमक मिलाकर अलग रख लें। 
2)- पिज्जा बेस के किनारे की थोड़ी जगह छोड़कर सॉस को पूरे पिज्जा बेस पर फैला दें। अब उस पर कसा हुआ चीज डालें। उसके ऊपर प्याज और शिमला मिर्च डालें। इसी तरह सारे पिज्जा तैयार कर लें। 
3)- पहले से गरम ओवन में 180 डिग्री सेल्सियस पर पंद्रह मिनट तक बेक करें। आपके मिनी पिज्जा तैयार हैं 
गरमागरम अपने बच्चों को खिलाएँ। 














Saturday, 25 April 2015

बैंगन मसाला ( Baingan Masala )










सामग्री :





छोटे बैंगन - 10 से 12 
सौंफ पाउडर - 1 टेबलस्पून 
धनिया पाउडर - 1/2 टेबलस्पून 
लाल मिर्च पाउडर - 1/2  छोटी चम्मच 
हल्दी पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच 
गरम मसाला पाउडर - 1/2 छोटी चम्मच 
अमचूर पाउडर - 1/2 छोटी चम्मच 
नमक स्वादानुसार 
तेल - 1 छोटी चम्मच 





विधि :




1)- बैंगन को पानी से धो लें और बैंगन के निचले भाग में दो काट लगा दें। 
2)- एक प्लेट में सौंफ पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर,गरम मसाला पाउडर, अमचूर पाउडर और नमक को मिला लें। फिर सभी बैंगन के कटे भाग को मसाले से भर लें। 
3)- पैन में तेल गरम करें उसमें एक-एक करकें बैंगन डालें और आधा कप पानी डालकर ढक्क्न लगा दें और धीमी आँच पर दस से पन्द्रह मिनट तक पकने दें। 
4)- बैंगन मसाला तैयार हैं। गरमागरम रोटी के साथ परोसे। 













Friday, 24 April 2015

फायदे अदरक के


                        



हमारी रसोई में अदरक का काफी उपयोग होता हैं। अदरक का प्रयोग सब्जी, मुरब्बा, चटनी और अचार के रूप में होता हैं। सोंठ का प्रयोग भी होता हैं। सोंठ का उपयोग जाड़ों में ही करना चाहिए गर्मियों में इसके उपयोग से बचना चाहिए। औषधियों से भरपूर अदरक का संतुलित उपयोग कर सकते हैं। 



1)- अदरक और प्याज का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से उल्टी बन्द हो जाती हैं। 
2)- जाड़ों में अदरक और लहसुन की सब्जी बना कर खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता हैं। 
3)- अदरक का रस, नीबू का रस और शहद को बराबर मात्रा में लेकर उसमें पिपरी डालकर दिन में दो से तीन बार पिएँ। खाँसी में लाभ मिलता हैं। 
4)- भूख ठीक से नहीं लग रही हो, पेट में गैस हो, कब्ज हो तो अदरक को बारीक़ काटकर उसमें नमक छिड़ककर खाएँ लाभ मिलेगा। 
5)- अगर आवाज बैठ गई हो तो अदरक का रस शहद में मिलाकर खाने से आवाज़ खुलती हैं।
6)- 4 ग्राम सोंठ का चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से मसूढ़ों की सूजन और दाँतों के दर्द में आराम मिलता हैं।
7)- अदरक का रस, पुदीने का रस और सेंधा नमक मिलाकर पीने से पेट दर्द में तुरन्त आराम मिलता हैं।
8)- अदरक, अजवायन और गुड़ बराबर मात्रा में कूट लें और इसे देसी घी में भूनकर पानी डालकर पकाएँ। इसे रोज खाने से कब्ज दूर होती हैं।
9)- अपच के चलते पेट में जलन हो, तो दो गन्ने का रस एक गाँठ अदरक के रस के साथ पिएँ।  जलन से आराम मिलेगा।
10)- अदरक और पुदीने का काढ़ा बनाकर पीने से शीत ज्वर में आराम मिलेगा। 

बैंगन चटनी ( Baingan Chutney)












सामग्री :




बैंगन (मध्यम आकार का )- 1 
नीबू का रस - 1 टेबलस्पून 
हरी मिर्च - 2 
चीनी - 1/2 छोटी चम्मच 
जीरा - 1/2 छोटी चम्मच 
हरा धनिया (बारीक़ कटा )- 2 टेबलस्पून 
नमक स्वादानुसार 




विधि :




1)- बैंगन को आँच पर भूने ठंडा होने पर छिलका उतार कर गूदा अलग कर दें। 
2)- मिक्सर जार में बैंगन का गूदा, हरी मिर्च, चीनी, नीबू का रस, जीरा, हरा धनिया और नमक डालकर बारीक़ पीस लें 
3)- आपकी बैंगन चटनी तैयार है। फ्रिज में रखे सैन्डविच और रोटी के साथ परोसें। 








Tuesday, 21 April 2015

स्ट्रॉबरी लाइम फ्रेश कप ( Strawberry Lime Fresh Cup )










4 - गिलासों के लिए 



सामग्री :


फ्रेश स्ट्रॉबरी - 20 
आइस क्यूब्स - 8 
चीनी पाउडर - 1/2 कप 
नीबू का रस - 4 टेबलस्पून 
काला नमक - 1/2 छोटी चम्मच 
भुना जीरा पाउडर - 1/2 छोटी चम्मच
ड्रिंकिंग सोडा - 1 बोतल





विधि :



1)- मिक्सर जार में स्ट्रॉबरी, आइस क्यूब्स, चीनी, नीबू का रस, नमक और भुना जीरा पाउडर डालकर पीस लें और प्यूरी तैयार कर लें। 
2)- अब हर एक गिलास में स्ट्रॉबरी प्यूरी डालें।  गिलासों में सोडा डालें। स्ट्रॉबरी लाइम फ्रेश कप तैयार हैं। शीघ्र ही सर्व करें। 









Monday, 20 April 2015

बैंगन का भरता ( Eggplant Bharta)







सामग्री :


बैंगन - 2 मध्यम 
प्याज बारीक़ कटा - 1 बड़ा 
टमाटर बारीक़ कटा - 2 मध्यम 
हरी मिर्च बारीक़ कटी - 2 
हरा धनिया बारीक़ कटा - 2 टेबलस्पून 
नमक स्वादानुसार 
तेल - 1 छोटी चम्मच 



विधि :

1)- बैंगन को आँच पर भूने ठंडा होने पर छिलका उतार कर गूदा निकालें और गूदे को मैश कर लें। 
2)- नॉनस्टिक पैन को गरम करें उसमें तेल डालकर गरम करें प्याज डाले और प्याज के गुलाबी होने तक भूने। टमाटर और हरी मिर्च डालकर एक मिनट तक भूने नमक और मैश किया हुआ बैंगन मिलाकर चलाएँ। 
3)- हरी धनिया से सजाए और गरमागरम परोसें। 



                               (आप चाहे तो अॉलिव ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं )













Sunday, 19 April 2015

वसा में घुलनशील विटामिन (Fat Soluble Vitamins)




                                                वसा में घुलनशील विटामिन   

                                                  (Fat Soluble Vitamins)




इस वर्ग के कुछ विटामिन शरीर में संश्लेषित हो जाते हैं। परन्तु यह मात्रा शरीर की आवश्यकतानुसार पर्याप्त नहीं रहती। अतः भोजन द्वारा इनकी भी पूर्ति करनी पड़ती है। यह विटामिन जल में घुलनशील नहीं होते, वसा में घुलनशील होते हैं। शरीर में इनकी आवश्यकता से अधिक मात्रा संचित हो जाती है तो इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। इनकी कमी व अधिकता दोनों ही स्थितियाँ दुःखदायी होती हैं।





इस वर्ग के मुख्य विटामिन निम्न हैं -

1)- विटामिन 'ए' या रेटिनॉल (Retionl)
2)-विटामिन 'डी' या कैल्सीफेरल (Calciferol)
3)- विटामिन 'ई' या टोकोफेरल (Tochoferol)
4)- विटामिन 'के' या  (Anti hemerrhagic)

Tuesday, 14 April 2015

जल में घुलनशील विटामिन (Water Soluble Vitamins)




                                                 जल में घुलनशील विटामिन

                                                (Water Soluble Vitamins)




इस प्रकार के विटामिन जल में घुलनशील होते हैं। शरीर में इनकी मात्रा संश्लेषित न हो पाने के कारण इनकी पूर्ति भोजन द्वारा ही करनी पड़ती हैं। जल में घुलनशील होने के कारण आवश्यकता से अधिक शरीर में पहुँचने पर जल के साथ ही घुलित अवस्था में उत्सर्जित कर दिए जाते हैं। इस वर्ग के अन्तर्गत विटामिन 'बी' व 'सी' आते हैं।




विटामिन 'बी' या थायमिन (Thiamine)




यह विटामिन एक न होकर कई विटामिनों का समूह है। इनकी संरचनाओं व कार्यों में विभिन्नता होती है। पहले बेरी-बेरी रोग जिस विटामिन की कमी से होता था उसी को विटामिन 'बी' कहा जाता था। धीरे-धीरे ज्ञात हुआ कि विटामिन 'बी' एक ही पदार्थ न होकर अनेक यौगिकों का समूह है इसीलिए इसे विटामिन 'बी' कॉम्पलैक्स ( B Complex) नाम दिया गया। इस वर्ग के अन्तर्गत आने वाले कुछ विटामिन्स के नाम इस प्रकार है -



1)- विटामिन थायमिन (Thiamine)
2)-विटामिन राइबोफ्लेबिन (Riboflavin)
3)-नायसिन या निकोटिनिक एसिड (Niacin or Nicotinic Acid)
4)-विटामिन  पाइरिडोक्सिन (Pyridoxin)
5)- पेंटाथैनिक एसिड (Pentothenic Acid)
6)- फोलिक एसिड ( Folic Acid )
7)- कोलीन (Choline)
8)- बायोटिन (Biotene)
9)- इनासीटोल (Inositol)
10)- पैरा अमीनो बैंजोइक एसिड (Para Amino Benzoic Acid)
11)- सायनोकोबालमिन (Cyanocobalamine)





Sunday, 5 April 2015

विटामिन्स के गुण (PROPERTIES OF VITAMINS )





                                                 विटामिन्स के गुण

                                    (PROPERTIES OF VITAMINS)

1)- विटामिन्स प्राणी तथा वनस्पति दोनों में पाये जाते हैं। मुख्यतः ये वनस्पति से प्राप्त किये जाते हैं। 
2)- इनकी दैनिक आवश्यकता बहुत कम होती है लेकिन ऐसी स्थितियाँ जैसे गर्भावस्था, दूध का स्रवण, बाल्यावस्था - जिसमें चयापचय की क्रियाएँ तेज गति से होती हैं - विटामिन्स की दैनिक आवश्यकता अधिक होती है। 
3)- कुछ विटामिन्स जैसे वसा विलेय विटामिन्स, विटामिन 'सी' को छोड़कर इनका शरीर में संग्रह (Storage) नहीं होता है। 
4)- ये शक्तिशाली कार्बनिक पदार्थ होते है। 
5)- कुछ विटामिन जैसे A और D का शरीर में संश्लेषण होता है। 
6)- विटामिन्स पाचन विधि में नष्ट नहीं होते हैं। वे उसी रूप में अवशोषित कर लिए जाते है। 
7)- विटामिन को-एन्जाइम (Co-enzyme ) के रूप में चयापचय की क्रियाओं में भाग लेते है। 
8)- विटामिन जीवन के लिए अति आवश्यक पदार्थ है। 
9)- विटामिन नानएन्टीजेनिक (Non- antigenic) होते है। 
10)- कुछ विटामिन्स पानी में और कुछ वसा में घुलनशील होते हैं। 
11)- विटामिन्स को कृत्रिम विधि से संश्लेषित किया जाता हैं।  
12)- विटामिन की कमी से कई प्रकार के रोग हो जाते हैं। 

Saturday, 4 April 2015

सुरक्षात्मक तत्व - विटामिन (Protective Nutrient - Vitamins)




                                              सुरक्षात्मक तत्व - विटामिन   

                                        ( Protective Nutrient - Vitamins )



विटामिन (Vitamine ) शब्द 1912 में सर्वप्रथम फंक (Funk) नामक वैज्ञानिक द्वारा प्रस्तावित किया गया। चावल के ऊपरी छिल्के से प्राप्त तत्व को बेरी-बेरी के रोगी को खिलाने से लाभ होता है। जीवन के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक तत्व होने के कारण इसका नाम Vitamine ( Vital + Amines ) दिया गया। जीवन 
( Vital ) के लिए आवश्यक तथा बेरी-बेरी विरोधी तत्व (Preventing element ) में नाइट्रोजन (Amine) की उपस्थिति के कारण ही यह नाम ( Vitimine ) अधिक उपयुक्त समझा गया।  बाद में इस धारणा को गलत पाया गया क्योंकि पैलाग्रा,स्कर्वी,रिकेट्स आदि का सफलतापूर्वक उपचार करने वाले विटामिनों में नाइट्रोजन (amine) समूह बहुत कम मात्रा में ही पाया गया। अतः Vitamine शब्द के अन्त का e (ई) पृथक कर दिया गया।




"विटामिन एक प्रकार के कार्बनिक यौगिक होते हैं, जिनकी भोजन में उपस्थिति बहुत कम मात्रा में ही, परन्तु शारीरिक वृद्धि हेतु बहुत आवश्यक होती है। ये शरीर के नियामक (Regulators) की भाँति कार्य करते हैं तथा शरीर की चयापचयी क्रियाओं पर नियन्त्रण रखने वाले तत्व हैं। यदि ये तत्व भोजन में न मिलें तो विभिन्न हीनता जनित रोग हो जाते हैं।"




विटामिनों को ए, बी, सी, डी, ई, के आदि नाम दिए गए हैं। सन 1915 में मैकालम नामक वैज्ञानिक ने इन विटामिनो में से कुछ को जल में घुलनशील पाया तथा कुछ को वसा में घुलनशील। इसी आधार पर विटामिन का वर्गीकरण किया गया।




जल में घुलनशील विटामिन -

विटामिन 'बी' (काम्प्लैक्स)
विटामिन 'सी' 


वसा में घुलनशील विटामिन -

विटामिन 'ए'
विटामिन 'डी'
विटामिन 'ई'
विटामिन 'के'


Tuesday, 24 March 2015

अंगूर का जूस (Angoor Ka Juice)







गर्मी की दोपहर में ठंडा-ठंडा अंगूर जूस आपका पेट तो भरेगा ही साथ ही आपके शरीर को ठंडक और स्फूर्ति भी देगा।



सामग्री :


हरे अंगूर- 1 1/2 कप 
काले अंगूर- 1 1/2 कप 
भुना जीरा पाउडर - 1/2 छोटी चम्मच 
काला नमक - 1/2 छोटी चम्मच 
ताजा पुदीना पत्तियाँ - 1/2 कप 
नीबू का रस - 1 छोटी चम्मच 
कुटी बर्फ - 1 कप 




विधि :



1)- मिक्सर में काले अंगूर, हरे अंगूर, जीरा पाउडर, काला नमक, पुदीना पत्तियाँ और नीबू का रस डालकर पीस लें और मुलायम प्यूरी तैयार कर लें छानकर जार में निकाल लें। 
2)- चार गिलासों में कुटी बर्फ डालें उन पर जूस डालें ठंडा-ठंडा जूस सर्व करें। 

























Thursday, 12 March 2015

अंगूर,पाइनएप्पल,पपीता पंच (Grapes, Pineapple, Papaya Punch)








जल्दी से बनने वाला यह फ्रूट जूस आपको ताजगी और स्फूर्ति से भर देगा।




सामग्री :


काले अँगूर - 2 कप 
पपीता ( टुकड़ों में कटा )- 2 कप 
पाइनएप्पल ( टुकड़ों में कटा )- 1 कप 
आइस क्यूब - 4 



विधि :



1)- सभी सामग्री को एक साथ आधा कप ठन्डे पानी के साथ मिक्सर में डालकर पीस लें और मुलायम प्यूरी तैयार कर ले और छानकर एक जार में निकाल लें।  
2)- गिलासों में आइस क्यूब डालें और उस पर जूस डालें ठंडा -ठंडा जूस सर्व करें। 














Tuesday, 15 April 2014

हेल्दी वेजिटेबल जूस ( Healthy Vegetable Juice )




सुबह-सुबह आप ठंडा-ठंडा एक गिलास भर कर हेल्दी वेजिटेबल जूस पिए तो पूरे दिन आप अपने आप को तरो ताजा पाएगें



सर्विंग्स - 4 


सामग्री :



टमाटर - 3 मध्यम 
चुकन्दर - 1 मध्यम 
गाजर - 3 मध्यम 
करेला - 1 छोटा 
लौकी - 1 मध्यम 
अदरक - 1 इंच टुकड़ा 
नींबू का रस- 1 टेबलस्पून 
कालीमिर्च पाउडर - 1/2 छोटा चम्मच 
नमक स्वादानुसार 
ताजी पुदीना पत्ती - 1/2 कप 
आइस क्यूब और पुदीना पत्ती - (सर्व करने के लिए )




विधि :



1)- गाजर, टमाटर, चुकन्दर, करेला, लौकी और अदरक को टुकड़ों में काटे।
2)- सभी सब्जियों और पुदीना पत्ती को जूसर में डालकर जूस निकाल लें। जूस एक जार में इक्ट्ठा कर लें और छान लें। 
3)- फिर उसमें नीबू का रस, कालीमिर्च पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाए चार गिलासों में कुछ आइस क्यूब रखें उन पर सब्जियों का जूस डालें ऊपर से पुदीना पत्ती से सजाएं। ठंडा - ठंडा जूस सर्व करें 



हेल्दी फ्रूट जूस ( Healthy Fruit Juice )










नाशपाती, सेव, पालक और पुदीने से बना हेल्दी जूस जिसे पीने के बाद अपने आपको तरो ताजा महसूस करेगें।



सर्विंग्स - 4 




सामग्री :

              

नाशपाती (टुकड़ों में कटी )- 3 बड़ी 
हरे सेव ( टुकड़ो में कटे )- 3 बड़े 
बेबी पालक - 1 कप 
ताज़ी पुदीना पत्ती - 1/2 कप 
आइस क्यूब पुदीना पत्ती (सर्व करने के लिए )




विधि :




1)- सभी सामग्री को जूसर में एक-एक करके डालें और जूसर चलाएँ रस निकाल कर एक जार में इकट्ठा कर लें। 
2)- गिलासों में बर्फ के क्यूब डालें उस पर जूस डालें ऊपर से पुदीना की पत्ती से सजाए ठण्डा - ठण्डा जूस सर्व करें। 

















Monday, 14 April 2014

ऊर्जा प्रदान करने वाला भोज्य तत्व - लिपिड्स (ENERGY YIELDING NUTRIENT- LIPIDS)




                              


                            ( ENERGY YIELDING NUTRIENT - LIPIDS)

                                 ऊर्जा प्रदान करने वाला भोज्य तत्व - लिपिड्स     



सामान्यतः वसाओं के साथ-साथ लिपिड्स भी आते हैं। यह एक प्रकार का वसा के समान दिखाई देने वाला पदार्थ है, जो वसा घोलकों, जैसे - पैट्रोलियम, ईथर, क्लोरोफार्म, बैंजीन, एल्कोहल तथा एसीटोन आदि में तथा स्वयं वसा में घुलनशील हैं। 
         लिपिड्स एक प्रकार के ईस्टर हैं जो ग्लिसरॉल तथा वसीय अम्लों के संयोग से बनते हैं। वसीय अम्ल (Fatty Acid ) दो प्रकार के होते है -

1)-संतृत्व वसीय अम्ल - (Saturated Fatty Acid )

जिन वसीय अम्ल में कार्बन के अणु के बराबर संख्या में हाइड्रोजन के अणु उपस्थित रहते हैं। उनको संतृत्व वसीय अम्ल (Saturated Fatty Acid ) कहते हैं।


2)-असंतृत्व वसीय अम्ल -(Unsaturated Fatty Acid )

वह अम्ल, जिसमें हाइड्रोजन तथा कार्बन अणुओं की संख्या समान न हो बल्कि हाइड्रोजन अणुओं की संख्या कार्बन अणुओं से कम हो, वे असंतृत्व वसीय अम्ल (Unsaturated Fatty Acid ) कहलाते हैं। 


                 

Wednesday, 19 March 2014

ऊर्जा प्रदान करने वाला भोज्य तत्व - वसा (ENERGY YIELDING NUTRIENT - FATS)




                            ऊर्जा प्रदान करने वाला भोज्य तत्व - वसा 

                      (ENERGY YIELDING NUTRIENT- FATS)




कार्बोहाइड्रेट व प्रोटीन की भाँति ही वसा भी भोजन के आवश्यक पोषक तत्व हैं वसा भोज्य पदार्थों में पाये जाने वाली वह चिकनाई है जिसके लिए हमें जन्तु व वनस्पति दोनों पर ही निर्भर रहना पड़ता है जन्तुओं के शरीर में चर्बी के रूप में तथा वनस्पति पदार्थ जैसे - अनाज, बीज व फलों में तेल के रूप में पायी जाती है

     वसा शरीर में ऊर्जा प्रदान करने वाले महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं इनका ऊर्जा मूल्य कार्बोहाइड्रेट में दुगने से भी अधिक होता है प्रायः कार्बोहाड्रेट की अपेक्षा वसा दुगनी मात्रा से भी अधिक ऊर्जा उत्पादित करते है कार्बोहाइड्रेट के 1 ग्राम से जहाँ 4 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है वहीं 1 ग्राम वसा से 9 कैलोरी ऊर्जा उत्पन्न होती है
     वसा एक कार्बनिक यौगिक है वसा का संगठन कार्बन (C), हाइड्रोजन (H), तथा ऑक्सीजन (O) तत्वों के रासायनिक संयोग से होता है वसा का निर्माण किसी एक ग्लिसरॉल पदार्थ एक वसीय अम्ल (Fatty Acid) के संयोजन से होता है वसा में कार्बन, हाइड्रोजन की अपेक्षा ऑक्सीजन तत्व काफी कम मात्रा में संयुक्त होते है हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का अनुपात जहाँ कार्बोहाइड्रेट में 1 : 2 होता है वहीं वसा में यह अनुपात 1 : 3 से
1 : 7 तक होता है संभवतः वसा के इसी गुण के कारण इसमें अधिक ऊर्जा देने की शक्ति होती है
     वसा युक्त पदार्थ यदि 20*C ताप पर भी ठोस ही बने रहें तो वह वसा का रूप है, जबकि यदि इसी तापक्रम पर तरल रूप में रहें तो यह तेल (Oil) कहलाता है


                        विभिन्न खाद्य पदार्थो में वसा की उपस्थित मात्रा 

                       भोज्य पदार्थ                                                                   वसा का प्रतिशत

                     वनस्पति तेल                                                                        100%
                     वनस्पति घी                                                                          100%
                     ताजा घी                                                                                100%
                     मक्खन                                                                                   80%
                     पनीर                                                                                      40%
                     सूखे मेवे                                                                                  50% 
                     दूध                                                                                          10%
                     सोयाबीन                                                                                 20%
                     मूंगफली                                                                                  35%
                     माँस                                                                                        70%
                     मछली                                                                                     30%
                     मुर्गी                                                                                        10%

Thursday, 20 February 2014

कार्बोहाइड्रेट की प्राप्ति के स्रोत (SOURCES OF CARBOHYDRATE)

                                         
   

                                       Sources Of Carbohydrate

                       

                                        कार्बोहाइड्रेट की प्राप्ति के स्रोत 



प्रायः समस्त भोज्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है कार्बोहाइड्रेट के अतिरिक्त अन्य पोषक तत्व भी भोजन में रहते है 

कार्बोहाइड्रेट की प्राप्ति के साधनों को दो वर्गों में बाँट सकते है -

1)- मीठे कार्बोहाइडेट या शर्करा

 2)- फीके कार्बोहाइडेट या स्टार्च 

1)- शर्करा युक्त पदार्थ - मीठे कार्बोहाइड्रेट जैसे - शक्कर, शहद, बूरा, गुड़, चीनी, किशमिश, खजूर, अंगूर, खुमानी व अन्य सूखे व मीठे फलों में पाये जाते है 

2)- स्टार्च युक्त पदार्थ - विभिन्न अनाज जैसे - गेहूँ, बाजरा, मक्का, चावल, चना, आटा, मैदा व विभिन्न दालों जैसे - सेम, राजमा, मटर, लोबिया, मैथी आदि व आटे से बने पदार्थ कार्बोहाइड्रेट की प्राप्ति के मुख्य स्रोत हैं विभिन्न कंदमूल सब्जियाँ जैसे - आलू, शकरकंद , अरबी, जिमीकंद तथा सूखे मेवे, काजू, बादाम, मूँगफली अखरोट आदि स्टार्चयुक्त होते है कच्चे केले में भी स्टार्च पाया जाता है 

1)- शक्कर, गुड़, चीनी, बूरा व शहद 
2)- आलू व साबूदाना 
3)- समस्त अनाज जैसे गेहूँ, चना, मक्का व जौ इत्यादि 
4)- सभी दालें 
5)- सूखे फल - किशमिश, मुनक्का, खजूर, अंजीर, इत्यादि 
6)- मूँगफली, अखरोट, बादाम, काजू व पिस्ता आदि 
7)- सोयाबीन, सूखी मटर, सेम, राजमा, लोबिया आदि के बीज 
8)- अरबी, शकरकंद, जिमीकंद आदि 
9)- केला व अन्य मीठे व ताजे फल 
10)- विभिन्न शाक सब्जियाँ 



   




 
                                           

Monday, 10 February 2014

ऊर्जा प्रदान करने वाला भोज्य तत्व - कार्बोहाइड्रेट ( ENERGY YIELDING NUTRIENTS - CARBOHYDRATE )









                          ऊर्जा प्रदान करने वाला भोज्य तत्व - कार्बोहाइड्रेट   

                           ( ENERGY YIELDING NUTRIENTS - CARBOHYDRATE )




हमारे आहार का महत्त्वपूर्ण भाग कार्बोहाइड्रेट ही है कार्बोहाइड्रेट को कार्बोज भी कहते है कार्बोज शब्द से मुख्य रूप से उन सभी कार्बनिक यौगिकों के समूह से है जो कि आवश्यक रूप से तीन तत्वों - कार्बन, ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन - से बने होते है कार्बोहाइड्रेट भोजन का मुख्य अंग है यह शरीर में वही कार्य करता है जो रेलगाड़ी के इंजन में ईंधन करता है जिस प्रकार ईंधन जलकर ऊर्जा देता है जिससे इंजन गतिमान होता है, उसी प्रकार कार्बोहाइड्रेट रूपी ईंधन श्वाँस द्वारा ली गई ऑक्सीजन द्वारा जलता है, फलस्वरूप ऊर्जा व ताप विमुक्त होता है, जो शरीर की विभिन्न गतिविधियों व कार्य हेतु आवश्यक है सामान्यत शारीरिक गति व कार्य हेतु हमें जितनी ऊर्जा व ताप की आवश्यकता होती है उसका 55 -60% भाग की पूर्ति हम कार्बोहाइड्रेट द्वारा कर लेते है
    वनस्पति से प्राप्त खाद्य पदार्थों में कार्बोज काफी मात्रा में पाया जाता है इनमें कार्बोज मुख्यतः शर्करा
  ( Sugar ), स्टार्च ( Starch ), तथा रेशे ( Fibre) के रूप में होता है सभी प्रकार के कार्बोज कुछ मूल इकाइयों से मिलकर बने होते है ग्लूकोस इस प्रकार की मूल इकाई का एक प्रमुख उदाहरण है अन्य उदाहरण हैं - फ्रॅक्टोस तथा ग्लेक्टोस
   इन सभी प्रकार के कार्बोज जैसे शर्करा, स्टार्च तथा रेशे को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है - उपलब्ध कार्बोज तथा अनुपलब्ध कार्बोज शर्करा तथा स्टार्च मनुष्य के पाचन तंत्र में आसानी से पच जाते हैं तथा शरीर में विभिन्न कार्यों के लिए उपलब्ध हो सकते है अतः इन्हें उपलब्ध कार्बोज कहा जाता है सेलूलोज़ तथा कुछ अन्य कार्बोज मनुष्य के पाचन तंत्र में नहीं पचाए जा सकते इन्हें रेशे अथवा अनुपलब्ध कार्बोज कहा जाता है 


Wednesday, 4 December 2013

प्रोटीन की दैनिक आवश्यकता ( DAILY NEED OF PROTEINS )

             



               

                                         प्रोटीन की दैनिक आवश्यकता

                                   (DAILY NEED OF PROTEINS)



  प्रौढ़ पुरूषों को प्रोटीन लगभग 1 ग्राम/किग्रा, भार के हिसाब से आवश्यक होती है बच्चों की प्रोटीन    आवश्यकता, वृद्धि की आवश्यकता के कारण अधिक होती है ( ICMR ) न्यूट्रीशन एक्सपर्ट ग्रुप न 1981 में भारतीयों के लिए प्रोटीन की निम्न मात्राएँ निर्धारित की हैं -



          पुरूषों के लिए                                                      55 ग्राम 
          स्त्रियों के लिए ( सामान्य अवस्था )                      45 ग्राम 
          स्त्रियों के लिए ( गर्भावस्था )                                55 ग्राम 
          स्त्रियों के लिए ( धात्री अवस्था )                           70 ग्राम 
          शिशु ( जन्म से 6 मास )                                      2 ग्राम/किग्रा, वजन 
          शिशु ( 7 माह से 1 वर्ष )                                       1.7 ग्राम/ किग्रा, वजन 
          बालकों के लिए 1 वर्ष                                          17 ग्राम 
                                  2 से 3 वर्ष                                   22 ग्राम 
                                  4 से 6 वर्ष                                   29.4 ग्राम 
                                  7 से 9 वर्ष                                   35.6 ग्राम 
                                  10 से 12 वर्ष                               42.5 ग्राम 
          किशोरावस्था 13 से 15 वर्ष के लड़के                    55 ग्राम 
                                                  लड़कियाँ                    50 ग्राम 
                               16 से 18 वर्ष के लड़के                    60 ग्राम 
                                                  लड़कियाँ                    50 ग्राम