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Friday, 14 August 2015

ड्राईफ्रूट्स के फायदे (Benefits Of Dry-fruits)











सदियों से मेवे का प्रयोग उत्तम औषधि के रूप में किया जाता हैं ,क्योंकि मेवा स्वाद की नहीं ,बल्कि सेहत की दृष्टि से भी उतना ही फायदेमंद हैं। मेवे में मौजूद तत्व शारीरिक विकारों को दूर कर ,शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करते हैं। 
        अक्सर लोग वज़न बढ़ने के डर से मेवे का सेवन करने से बचते हैं,क्योंकि मेवे में हाई कैलोरीज़ और फैट्स होते हैं ,जबकि सच्चाई यह है कि मेवे सेहत के लिए काफ़ी फायदेमंद होते है ,विशेषज्ञों का मानना है कि मेवे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियन्त्रित कर शरीर को बीमारियों से बचाते हैं। आइए जाने सेहत की दृष्टि से मेवे कितने लाभकारी हैं ,




                                          अखरोट



1)- अखरोट ओमेगा -3 एसेंशियल फैटी एसिड का एक उत्तम स्रोत हैं इसलिए यह कार्डियो वेस्कुलर हेल्थ ,अस्थमा ,आर्थराइटिस ,एक्ज़िमा तथा सोराइसिस में भी लाभदायक है। 

2)-अखरोट प्रोटीन ,फाइबर ,आयरन ,मैग्रेशियम ,फॉस्फोरस ,कॉपर व मैगनीज का बढ़िया स्रोत है। 

3)- अखरोट में निहित इलेनिक एसिड एक एंटीऑक्सीडेंट है ,जो इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है ,इसके एंटी कैंसर गुण कैंसर से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं। 

4)-इसका नियमित सेवन अल्ज़ाइमर से बचाव करता है और ब्लड क्लॉटिंग को रोकता है। 

5)- अखरोट का सेवन महिलाओं में होने वाली गाल स्टोन की समस्या में भी फ़ायदेमंद होता है। 

6)- अखरोट में मौजूद मेलाटोटिन तत्व एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है ,जो अच्छी नींद में सहायक हैं ,जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या होती है ,उन्हें सोने से पहले अखरोट खाना चाहिए। 





                                               काजू 




1)- काजू में ओलिक एसिड होता है ,जो हार्ट फ्रेंडली तत्व है। 

2)- इसमें 75% अनसैचुरेटेड फैटी एसिड होता है ,जो हृदय के लिए अच्छा होता है। 

3)- गाल ब्लेडर में स्टोन के खतरे को कम करने के लिए काजू का सेवन करना चाहिए। 

4)- काजू का सेवन हड्डियों को मज़बूती प्रदान करता है ,क्योंकि इनमें मैग्रेशियम व कॉपर मौजूद होता है। 

5)- काजू का सेवन फ्री रेडिकल्स को दूर करने तथा मेलानिन का निर्माण करने में लाभदायक है। 

6)- कॉपर व आयरन बोन्स व कनेक्टिव टिशू (हड्डियों व योजक टिशू )को विकसित करने में सहायक होता है। 




                                            बादाम



1)-बादाम में आयरन ,कॉपर ,फॉस्फोरस तथा विटामिन बी -1 होते है ,जो नए ब्लड सेल्स तथा हीमोग्लोबिन के निर्माण में सहायक होते है ,ये शारीरिक अंगों की सही संचालन क्रिया में भी सहायक होते हैं। 

2)- बादाम कब्ज़ व कोलोन कैंसर की रोकथाम में भी लाभकारी है। 

3)- बादाम में मौजूद कैल्शियम तथा मैग्रेशियम हड्डियों को मज़बूती प्रदान करता है। 

4)- लो कैलोरी डायट के साथ बादाम का सेवन करने से वज़न कम होता है।

5)- कार्डियो वेस्कुलर हेल्थ के लिए बादाम बहुत लाभदायक है। 

6)- हाई ब्लड शुगर को नियन्त्रित करने में बादाम सहायक होता है। 

7)-  बादाम में विटामिन 'ई 'होता है ,इसे पैक के रूप में लगाने से त्वचा नर्म -मुलायम बनती है और पिंपल ,रिंकल व ड्राईनेस की समस्या कम होती है। 

8)- बादाम का नियमित सेवन ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है। 

9)- इसमें निहित सेलेनियम तत्व एजिंग प्रोसेस की गति को धीमी करता है। 

10)- प्रेग्रेंसी के दौरान बादाम का सेवन करने से गर्भस्थ शिशु में होनेवाले 
जन्म विकार का खतरा कम हो जाता है। 

11)- बादाम को भिगोकर खाना चाहिए ,भिगोए हुए बादाम आसानी से पच जाते है। 




                                               पिस्ता  



1)- पिस्ते का सेवन कोरोनरी आर्टरी रोग व हार्ट अटैक से बचाव करता है तथा अच्छे व खराब रक्त का संतुलन बनाने में सहायक होता है। 

2)- पिस्ते में एंटीऑक्सीडेंट अधिक मात्रा में होते हैं ,जो तनाव को कम करते है तथा इसमें मौजूद विटामिन्स व मिनरल्स आँखों की सेहत के लिए लाभकारी हैं। 

3)- मसाज थेरेपी ,एरोमा थेरेपी तथा कॉस्मेटिक इंड़स्ट्री में प्रयोग की जाने वाली दवाइयों में इसका इस्तेमाल होता है। 

4)- पिस्ते में मौजूद फ़ाइबर ब्लड शुगर के स्तर को नियन्त्रित करता है। 

5)- पिस्ते में मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मज़बूती प्रदान करता हैं तथा स्नायु की क्रिया को संतुलित रखता हैं। 

6)- पिस्ते में मौजूद आयरन ,हीमोग्लोबिन का निर्माण करने में सहायक होता है। 

7)- पिस्ते में प्रोटीन ,फैट्स व फाइबर्स अधिक मात्रा में होते है। 




                                         किशमिश 



1)- किशमिश आयरन का अच्छा स्रोत है ,अतः खून की कमी एनीमिया व कब्ज दूर करने में बहुत फायदेमंद हैं। 

2)- किसी भी बीमारी के बाद रिकवरी पीरियड में किशमिश का सेवन लाभप्रद हैं। 

3)- किशमिश में मौजूद ओलेनॉटिक एसिड दाँतों व मसूड़ों के रोगों से बचाव करता है और दाँतों पर जमे प्लाक से उत्पन्न होने वाले बैक्टीरिया को ख़त्म करता है। 

4)- किशमिश फाइबर्स का बढ़िया स्रोत होने के कारण कॉलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक होता है। 

5)- किशमिश में कैल्शियम होता हैं ,जो हड्डियों के लिए फ़ायदेमंद है। 
















Thursday, 6 August 2015

इटालियन पास्ता बीन सलाद (Italian Pasta Beans Salad)











सामग्री :




पास्ता (कोई भी आकार का उबला हुआ )-1 कप 
राजमा (उबले हुए )- 1 कप 
स्वीट कॉर्न - 1/2 कप 
टमाटर (बारीक़ कटे )- 1/2 कप 
शिमला मिर्च (बारीक़ कटी )- 1/2 कप 
पत्ता गोभी (बारीक़ कटी )- 1/2 कप 
पास्ता या पिज़्ज़ा सॉस - 2 टेबलस्पून 
एगलेस मेयोनीज - 2 टेबलस्पून 
नमक स्वादानुसार 
काली मिर्च पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच 
दूध - 2 टेबलस्पून 





विधि :



1)- एक बाउल लें उसमें पास्ता और राजमा डालकर मिलाएँ। अब उसमें स्वीट कॉर्न ,टमाटर ,शिमला मिर्च और पत्ता गोभी डालें और अच्छी तरह मिलाएँ। 
2)- अब उसमें मेयोनीज ,पिज़्ज़ा सॉस ,काली मिर्च ,नमक और दूध डालकर अच्छी तरह मिला लें।  रेफ्रिजरेटर में पन्द्रह मिनट के लिए रखें। 
3)- रेफ्रिजरेटर से बाहर निकाल कर अपनी पसन्द के चिप्स के साथ सर्व करें। 












Monday, 27 July 2015

काली मिर्च चिकन विद अनियन रिंग्स (Kali Mirch Chicken With Onion Rings)











सामग्री :



चिकन - 1/2 किलो 
गाढ़ा दही - 2 टेबलस्पून 
अदरक -लहसुन पेस्ट - 1 छोटी चम्मच 
सोया सॉस - 1 टेबलस्पून 
काली मिर्च (कुटी हुई )- 1 छोटी चम्मच 
प्याज रिंग्स - 2 कप 
तेल - 3 टेबलस्पून 
नीबू का रस - 1 टेबलस्पून 
चाट -मसाला - 1 छोटी चम्मच 
नमक स्वादानुसार 




विधि :




1)- एक बर्तन में चिकन ,दही ,अदरक -लहसुन पेस्ट ,सोया सॉस ,काली मिर्च और नमक को अच्छी तरह मिलाएँ और आधा घंटे के लिए अलग रख दें। 
2)- एक नॉन स्टिक पैन लें। उसमें दो टेबलस्पून तेल गरम करें उसमें प्याज रिंग्स डालें और तीन से चार मिनट तक भूनें। उसमें नीबू का रस ,नमक और चाट मसाला डालें और अच्छी तरह मिलाएँ। आँच बन्द कर दें। 3)- नॉन स्टिक पैन में एक टेबलस्पून तेल डालकर गरम करें उसमें मेरीनटेड चिकन डालें तेज आँच पर दो मिनट तक भूने। पैन में ढक्क्न लगाएँ और धीमी आँच पर पाँच मिनट तक पकाएँ। ढक्क्न खोलें आँच तेज करें। चिकन को तीन से चार मिनट तक भूने। प्याज रिंग्स डालें। (थोड़े रिंग्स ऊपर से सजाने के लिए रख लें। )अच्छी तरह मिलाएँ आँच बन्द कर दें 
4)- प्लेट में चिकन डालें और प्याज रिंग्स से सजा कर गरमागरम चिकन सर्व करें। 












Monday, 20 July 2015

चीज़ कॉर्न बॉल्स (Cheese Corn Balls )










सामग्री :



स्वीट कॉर्न - 1 कप 
पनीर (कसा हुआ )- 1 कप 
मोज़्ज़ारेल्ला चीज़ (कसा हुआ )- 1 कप 
मैदा - 1/4 कप 
कॉर्नफ्लोर - 2 टेबलस्पून 
हरी मिर्च (बारीक़ कटी )-2 
हरा धनिया (बारीक़ कटा )- 1/4 कप 
ब्रेड का चूरा - 1 कप 
नमक स्वादानुसार 
दूध - 1/4 कप 
तेल - तलने के लिए 


विधि :


1)- स्वीट कॉर्न के दानों को पाँच मिनट तक उबाल कर छान ले और ठंडा कर लें। मिक्सर जार में डालकर पीस कर पेस्ट बना लें और अलग रख लें। 
2)- एक बाउल में कॉर्न पेस्ट ,पनीर ,चीज़ ,मैदा ,कॉर्नफ्लोर ,हरी मिर्च ,हरा धनिया और नमक डालकर अच्छी तरह से मिला लें और मिश्रण तैयार कर लें। 
3)- सारे मिश्रण से छोटे -छोटे बॉल्स बना लें और फ्रिज में बीस मिनट तक रख दें। 







4)- बॉल्स फ्रिज से निकाले। दूध में डुबोए और ब्रेड के चूरे में अच्छी तरह लपेट लें। इसे फ्रिज में फिर से बीस मिनट तक रखें। 









5)- पैन में तेल गरम करें। बॉल्स को फ्रिज से निकाल कर दो मिनट तक ऐसे ही रखें। जब तेल गरम हो जाएं तो बॉल्स को गोल्ड़न ब्राउन होने तक तल लें। बॉल्स को ज्यादा तेज आँच पर न तलें। मध्यम आँच पर ही तलें। 
6)- गरमागरम चीज़ कॉर्न बॉल्स अपनी पसन्द की चटनी के साथ परोसे। 














Sunday, 12 July 2015

फायदे नीबू के (Benefits OF Lemon )










नीबू एक ऐसा फल है जिसकी खूशबू मात्र से ही ताजगी का एहसास होता है। चाट हो या दाल कोई भी व्यंजन इस के प्रयोग से स्वादिष्ट हो जाता है। यह फल खट्टा होने के साथ -साथ बेहद गुणकारी भी है तो जाने नीबू के फायदे। 




1)- नीबू के पत्तों का रस निकाल कर अच्छी तरह सूँघे। सिरदर्द में आराम मिलता है। जिस व्यक्ति को हमेशा सिरदर्द बना रहता है ,उसे भी इससे शीघ्र आराम मिलता है। 

2)- दस ग्राम नीबू का रस ,दस बूँदे ग्लिसरीन तथा दस ग्राम गुलाबजल को मिलाकर रख लें। इस लोशन को प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद तथा रात को सोने से पहले चेहरे पर हल्के -हल्के मलने से चेहरा कोमल बन जायेगा। 
        नीबू के रस में बराबर मात्रा में गुलाबजल मिलाकर चेहरे पर लगाएं। आधे घंटे बाद ताजे पानी से धो लें। चेहरे के मुंहासे बिल्कुल साफ़ हो जाएँगे यह प्रयोग करीब दस से पन्द्रह दिनों तक करें। 

3)- दस ग्राम नीबू के पत्तों के रस (अर्क )में दस ग्राम शहद मिला कर पीने से दस -पन्द्रह दिनों में पेट के कीड़े मर जाते है। नीबू के बीजों के चूर्ण की फंकी लेने से भी कीड़े मर जाते है। 

4)- नीबू के रस में थोड़ा सेंहुड़ का दूध मिला कर मुँह में लगाने से जीभ के सभी विकार मिट जाते है। 

5)- नीबू के रस में दोगुना नारियल का तेल मिला कर हलके हाथों से सिर की मालिश करने से बाल झड़ना बंद हो जाते हैं व वे मुलायम भी हो जाते है साथ ही रूसी से भी मुक्त हो जाते है ,यदि सिर में रूसी हो ,तो नीबू के रस में नारियल का तेल मिला कर रात को सिर में मलें और सुबह कुनकुने पानी और रीठे के पानी से सिर को धोएं ,दो -चार बार यह क्रिया करने से खुश्की खत्म हो जाती हैं। 

6)- नीबू का रस व शहद मिला कर मसूड़ों पर मलते रहने से रक्त व पीप आना बंद हो जाते है। 

7)- दाँत दर्द होने पर नीबू को चार टुकड़ों में काट लीजिए ,इस के बाद ऊपर से नमक डाल कर सभी टुकड़े गरम कीजिए ,फिर एक -एक टुकड़ा दाँत व दाढ़ में रख कर दबाते जाएं व चूसते जाएं ,दर्द में राहत महसूस होगी। मसूड़े फूलने पर नीबू को पानी में निचोड़ कर कुल्ले करने से अत्यधिक लाभ होगा। 

8)- नीबू के रस व सरसों के तेल को मिला कर मंजन करने से दाँतों की चमक निखर जाएगी। 

9)- एक चम्मच नीबू का रस व शहद मिला कर पीने से हिचकी बंद हो जाएगी। इस प्रयोग में स्वादानुसार कालानमक भी मिलाया जा सकता हैं। 

10)- नीबू में फिटकरी का चूर्ण मिला कर खुजली वाले स्थान पर रगड़ें। खुजली समाप्त हो जाएगी। 

11)- नीबू के रस को दर्द वाले स्थान पर मलने से जोड़ों का दर्द व सूजन समाप्त हो जाएगी। 

12)- नीबू के रस में शहद मिला कर चाटने से सांस फूलने में काफी राहत महसूस होगी। 







Wednesday, 8 July 2015

विटामिन 'सी ' ( Vitamin 'C' or Ascorbic Acid)



             विटामिन 'सी '

  ( Vitamin 'C' or Ascorbic Acid)



स्कर्वी नामक रोग नाविकों को दीर्घकालीन समुद्री यात्रा के दौरान विशेष रूप से हो जाता था। इस रोग से ग्रसित व्यक्ति अधिकतर मृत्यु का शिकार हो जाते थे। स्कर्वी नामक रोग के कारण व उपचार ढूँढने के फलस्वरूप ही विटामिन 'सी 'का आविष्कार हुआ। 1753 में केप्टन जेम्सलिंड (James Lind)इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि रसीले ताजे व खट्टे फल इस रोग की स्थिति में लाभप्रद रहते हैं। 1928 में जैट ज्योर्जी (Szeut Gyorgy)व 1932 में वाग व किंग (Waugh &King)आदि वैज्ञानिकों ने संतरा ,नीबू व अन्य इसी प्रकार के फलों से विटामिन 'सी 'के क्रिस्टल अलग किये। 
     स्कर्वी रोग को दूर करने के कारण इस विटामिन का नाम एस्कार्बिक एसिड (Ascorbic Acid)पड़ा। 



मानव शरीर में विटामिन 'सी 'के कार्य :

विटामिन 'सी 'मानव शरीर में महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। 
1)- यह दाँत ,अस्थियों व रक्त वाहिनियों की दीवारों को स्वस्थ रखता है। 
2)- घाव को भरने में सहायता करता है। 
3)- यह लोहे के फैरिक को फैरस आयन में बदल देता है ,जिससे यह आँत में शीघ्रता से शोषित हो सके। 
4)- बच्चों में विटामिन 'सी 'की कमी से छाती में दर्द रहता है व श्वाँस लेने में परेशानी होती रहती है। 
5)- विभिन्न रोगों में निरोधक क्षमता बढ़ाता है। 
6)- एड्रीनल ग्रन्थि में हार्मोन के संश्लेषण में महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। 
7)- यह विटामिन विभिन्न कोशिकाओं को जोड़ने वाला पदार्थ कालेजन (Collagen)के निर्माण में सहायक है,जो कि शरीर के समस्त अंगों व हड्डियों में पाया जाता है। इस विटामिन की हीनता से मनुष्य की हड्डियाँ खोखली (Hollow)हो जाती हैं। 


विटामिन 'सी 'प्राप्ति के स्त्रोत :

1)-वनस्पति से -


यह आँवला व अमरुद में मुख्य रूप से होता है। इसके अतिरिक्त ताजे ,रसीले व खट्टे फलों जैसे -नीबू ,नारंगी व संतरा में यह प्रचुर मात्रा में मिलता है। अंकुरित अनाजों व दालों में भी यह उपस्थित रहता है। 

2)-जन्तुओं से -


दूध व माँस में इसकी अल्प मात्रा रहती है। 


   

Wednesday, 1 July 2015

पिस्ता मलाई कुल्फी(Pista Malai Kulfi)












सामग्री :


फुल क्रीम दूध - 1लीटर +1/2 कप 
पिस्ता - 1/4 कप 
काजू - 1/4 कप 
चीनी - 10 टेबलस्पून 
कॉर्नफ्लोर - 2 टेबलस्पून 
ईलायची पाउडर - 1/2 छोटी चम्मच 


विधि :


1)- काजू और पिस्ते को गरम पानी में दो घंटे के लिए भिगो दें। 
2)- काजू और पिस्ते से पानी निकाल लें। मिक्सर जार में काजू ,पिस्ता और 1/4 कप दूध डालकर बारीक़ पेस्ट बना लें। अलग रख लें। 
3)- एक भारी तले के बर्तन में दूध उबाल लें। चीनी डालें और पन्द्रह से बीस मिनट तक धीमी आँच पर पकाएँ। बीच -बीच में चलाते रहें। 








4)- 1/4 कप दूध में कॉर्नफ्लोर डालकर घोल तैयार कर लें। दूध में कॉर्नफ्लोर घोल ,ईलायची पाउडर और काजू -पिस्ता पेस्ट डालकर धीमी आँच पर लगातार चलाते हुए पन्द्रह मिनट तक या दूध के गाढ़े होने तक पकाएँ। आँच बन्द कर दें। 







5)- दूध को ठण्डा करें और कुल्फी मोल्ड्स में डालकर फ्रीजर में पूरी रात या आठ घण्टे तक जमने दें। 








6)- ठंडी -ठंडी स्वादिष्ट पिस्ता मलाई कुल्फी सर्व करें। 











Sunday, 21 June 2015

तरबूज की चुस्की(Tarbooz Ki Chuski)









सामग्री :



तरबूज (टुकड़ों में कटा )- 1 छोटा 
ताजी पुदीना पत्तियाँ - 1/2 कप 
पिसी चीनी - 5 छोटी चम्मच 
नीबू का रस - 4 टेबलस्पून 
काला नमक - 1 छोटी चम्मच 
भुना जीरा पाउडर - 1 छोटी चम्मच 



विधि :


1)- ब्लेन्डर में तरबूज के टुकड़े ,पुदीना पत्तियाँ ,चीनी ,काला नमक ,नीबू का रस जीरा पाउडर और आधा कप पानी डालकर बारीक़ पीस लें। छान लें।
2)- छाना हुआ तरबूज का रस आइसक्रीम मोल्ड्स में भर दें और फ्रीजर में पूरी रात के लिए जमने दें। 











3)-ठंडी -ठंडी स्वादिष्ट तरबूज चुस्की अपने बच्चों को खिलाएँ। 








Friday, 5 June 2015

भरवाँ शिमला मिर्च मखनी ग्रेवी के साथ (Stuffed Capsicum With Makhni Gravy)












सामग्री :


भरने का मसाला :


शिमला मिर्च (Capsicum)-5 से 6 
सोयाबड़ी चूरा (Granules)-1 कप 
पनीर (कसा हुआ )- 1/2 कप 
प्याज (बारीक़ कटा )- 1 बड़ी 
अदरक (बारीक़ कटा )- 1 टेबलस्पून 
लहसुन (बारीक़ कटा )- 1 टेबलस्पून 
हरी मिर्च (बारीक़ कटा )- 1 
लाल मिर्च पाउडर - 1 छोटी चम्मच 
गरम मसाला पाउडर - 1 छोटी चम्मच 
धनिया पाउडर - 1 छोटी चम्मच 
ताजी मलाई - 2 टेबलस्पून 
नमक स्वादानुसार 
तेल -2 टेबलस्पून 







ग्रेवी के लिए :



टमाटर (मोटा कटा )- 5 बड़े 
लहसुन (बारीक़ कटा )- 1 टेबलस्पून 
अदरक (बारीक़ कटा )- 1 टेबलस्पून 
काजू - 1/4 कप 
हरी ईलायची - 2 
गरम मसाला पाउडर - 1 छोटी चम्मच 
भुना जीरा पाउडर - 1 छोटी चम्मच 
कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर - 1 छोटी चम्मच 
चीनी - 1 छोटी चम्मच 
कसूरी मेथी - 1 टेबलस्पून 
ताजी मलाई - 2 टेबलस्पून 
नमक स्वादानुसार 
मक्खन - 2 टेबलस्पून 
तेल - 2 टेबलस्पून 




विधि :


भरने का मसाला :


1)- शिमला मिर्च को धोकर उनके डण्ठल काट लें और अन्दर के बीज भी निकाल कर खोखला कर लें। अलग रख लें। 
2)- सोयाबड़ी चूरे को पन्द्रह मिनट के लिए पानी में भिगो दें। सोयाबड़ी चूरे से पानी अच्छी रह निचोड़ दें और अलग रख लें। 
3)- पैन में तेल गरम करें। उसमें प्याज ,हरी मिर्च ,अदरक और लहसुन डालकर मध्यम आँच पर दो मिनट तक भून लें। उसमें सोयाबड़ी चूरा डालें और एक मिनट तक भून लें। लाल मिर्च पाउडर ,गरम मसाला पाउडर ,धनिया पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाते हुए दो मिनट तक पकाएँ। 
4)- पनीर और मलाई डालें अच्छी तरह मिलाकर तेज आँच पर एक मिनट तक पकाएँ। आँच बन्द कर दें आँच से मसाला उतार लें ठण्डा कर लें। 








5)- शिमला मिर्च में भरने के लिए मसाला तैयार हैं। अब शिमला मिर्च में मसाला भर लें। अलग रख लें। 








ग्रेवी के लिए :



1)- पैन में एक टेबलस्पून तेल गरम करें उसमें हरी ईलायची ,लहसुन ,अदरक और काजू डालकर एक मिनट तक भूने। टमाटर और कसूरी मेथी डालकर दो से तीन मिनट पकाएँ। आँच बन्द कर दें। मसाला ठण्डा करें और मिक्सर में दो टेबलस्पून पानी के साथ बारीक़ पीस लें। 
2)- पैन में बाकी बचा तेल और मक्खन गरम करें उसमें पिसा टमाटर मसाला डालकर दो मिनट तक भूने ,कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर ,गरम मसाला पाउडर ,भुना जीरा पाउडर ,चीनी और नमक डालकर दो मिनट तक पकाएँ। आधा कप पानी और मलाई डालकर ग्रेवी को एक मिनट तक उबाले। 








3)- अब उसमें भरी हुई शिमला मिर्च रखें और ढक्क्न लगाकर मध्यम आँच पर दस से बारह मिनट तक पकाएँ। आँच बन्द कर दें। 








4)- आपकी भरवाँ शिमला मिर्च मखनी ग्रेवी के साथ तैयार है। आप इसे गरमागरम रोटी ,नान या पराँठे के साथ सर्व करें। 








Monday, 1 June 2015

स्टफ्ड चीज़ और पालक आलू कटलेट (Stuffed cheese or palak aloo katlet)








सामग्री :



पालक (बारीक़ कटा )- 2 कप 
आलू (उबले ,मसले हुए )- 3 बड़े 
प्रोसेस्ड चीज़ क्यूब्स (कसा हुआ )- 4 
हरी मिर्च (बारीक़ कटी )- 3 
ब्रेड क्रम्ब्स - 1 कप 
गरम मसाला - 1 छोटी चम्मच 
अमचूर पाउडर - 1 छोटी चम्मच 
नमक स्वादानुसार 
तेल तलने के लिए 



विधि :




1)- एक बाउल में आलू ,पालक ,हरी मिर्च ,ब्रेड क्रम्ब्स ,गरम मसाला ,अमचूर पाउडर और नमक को अच्छी तरह मिला लें। 







2)- आलू के मिश्रण से 12 से 14 बॉल तैयार कर लें और आलू के बॉल को हथेली पर रख कर चपटा कर लें। एक छोटी चम्मच चीज़ लें और चपटे किए हुए भाग में भरकर आलू के बॉल को चारों तरफ से बन्द करते हुए मनचाहा आकार दें। इसी तरह सारे कटलेट तैयार कर लें। 








3)- कड़ाही में तेल गरम करें और उसमें कटलेट डालकर ब्राउन होने तक तल लें 
4)- गरमागरम कटलेट अपने पसन्द की चटनी के साथ परोसे। 





Sunday, 31 May 2015

विटामिन (बी 12 ) (Vitamin B12 or Cyanocobalamine)



विटामिन (बी 12 )

(Vitamin B12 or Cyanocobalamine)



विटामिन बी 12 की खोज परनीशियस एनीमिया रोग का निदान ढूँढ़ते समय हुई। प्रयोगों द्वारा देखा गया कि रोगी व्यक्ति को यकृत खिलाने से स्थिति में सुधार होता है। बाद में ज्ञात हुआ कि यकृत में उपस्थित बी 12 इस रोग के उपचार में सहायक है। इसे कोबामाइड (Cobamide),एंटीपरनीशियस एनीमिया फेक्टर (Antipernicious Anaemia Fector),एक्स्ट्रीन्सीक फेक्टर ऑफ केस्टल (Extrinsic Fector of Castle)के भी नामों से संबोधित करते है। मिनोट तथा मर्फी (Minot & Murphy)को 1934 में इस विटामिन की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। 1948 में स्मिथ तथा साथियों के द्वारा इसे क्रिस्टल रूप में प्राप्त किया गया। विटामिन बी 12 प्राणियों की प्रायः सभी कोशिकाओं में मिलता है। मनुष्य को इसकी पूर्ति के लिए भोजन पर निर्भर रहना पड़ता है किन्तु कुछ प्राणी आँतों में इसका निर्माण कर सकते हैं। ये पौधों में नहीं मिलता है। 


कार्य :

1)- यह प्रोटीन के चयापचय में सहायक होता है। 
2)- अस्थि मज्जा में रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक है। 
3)- नाड़ी ऊतकों की चयापचयी क्रिया में सहायक है। 


स्रोत :


प्रमुख रूप से जन्तु ऊतकों द्वारा ही प्राप्त होता है। इसके मुख्य स्रोत यकृत ,अण्डा ,माँस ,मछली ,दूध आदि है। 
                  

फोलिक एसिड (Folic Acid) कोलीन (Choline) इनासिटॉल (Inositol) पैराअमीनो बैंजोइक एसिड (Para amino Benzoic Asid)




फोलिक एसिड 

 (Folic Acid)



इसे टेरिल ग्लुटामिक एसिड (Pteroylglutamic Acid)भी कहते है। डे (Day)ने इस पोषक फेक्टर के अस्तित्व का सुझाव दिया। माइकेल,स्नेल तथा विलियम्स (Mitchell,Snell & Williams)ने इसे फोलिक नाम दिया क्योंकि इस विटामिन को पालक की पत्तियों (L.Folium)से प्राप्त किया गया था। 


कार्य :

कोशिकाओं के केन्द्रक में पाये जाने वाले न्यूक्लियोप्रोटीन के निर्माण में महत्त्वपूर्ण कार्य करता हैं। लाल और श्वेत रक्त कणिकाओं के निर्माण में भी इसका योगदान रहता है। 


प्राप्ति के स्रोत :

खमीर ,गेँहू व चावल की ऊपरी पर्त (Germ)दाल ,हरी पत्ते वाली सब्जियों में पाया जाता है। 






  कोलीन 

(Choline)



यह एक महत्त्वपूर्ण मेटाबोलाइट (Matabolite)है। यह शरीर द्वारा संश्लेषित किया जाता है। यह फास्को लिपिड्स का एक प्रमुख अवयव है। यह तन्त्रिका-तन्त्र (Nervous system)में होता है। 


कार्य :

इसका प्रमुख कार्य यकृत में अधिक वसा के संग्रहण को रोकना हैं। नाड़ी ऊतकों की संवेदना क्षमता बनाए रखने के अतिरिक्त भी अनेक शरीर नियामक कार्य करता है। 


प्राप्ति के स्रोत :


यकृत ,गुर्दे ,साबुत अनाज ,दालें ,माँस ,दूध व अण्डे के पीले भाग में प्रमुख रूप से पाया जाता है। 





इनासिटॉल 

(Inositol)


जान्तव व वानस्पतिक ऊतकों में यह विटामिन पाया जाता है। मनुष्य में इसकी कमी से अभी तक किसी रोग के होने की जानकारी नहीं मिली हैं। इसकी कमी से Mice में गंजापन आ जाता है। 


कार्य :

इसकी आहार में पर्याप्त मात्रा लेते रहने पर यकृत में अधिक वसा एकत्रित नहीं हो पाती है। 


प्राप्ति के स्रोत :

विभिन्न फल ,सब्जियाँ ,साबुत अनाज ,नट्स ,खमीर ,यकृत ,दूध व दालों में इसकी उपस्थिति होती है। 




  पैराअमीनो बैंजोइक एसिड 

(Para amino Benzoic Asid)



यह भी जान्तव व वानस्पतिक पदार्थ दोनों में ही पाया जाता है। मनुष्य में इसकी कमी से होने वाले रोगों तथा इसके कार्यों का अभी तक ज्ञान नहीं किया गया। इसकी प्राप्ति खमीर ,दूध ,यकृत ,चावल व गेँहू से होती है। 









Saturday, 30 May 2015

बायोटिन (Biotin)




   बायोटिन

   (Biotin)


इसे विटामिन 'एच ' भी कहते हैं। 1916 में बेटमेन (Bateman)ने बताया कि कच्चे अण्डे में एक क्षारीय प्रोटीन एवीडीन (Avidin)होता है जो बायोटिन को नष्ट कर देता है लेकिन पके अण्डे में ऐसा नहीं होता हैं। अतः पके अण्डे खिलाने पर अण्डे की सफेदी का रोग (Egg White Injury)नहीं होती है। 


कार्य :


1)- यह  (कार्बनडाइ-आॅक्साइड)स्थिरीकरण में कार्बोक्सीलेज एन्जाइम के साथ को-एन्जाइम का कार्य करता है ;जैसे -यूरिया निर्माण में,पिरिमिडीन के संश्लेषण में,वसीय मात्रा के संश्लेषण आदि में। 
2)- यह मुख्यतः त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने का महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। 
3)- यह कोशिकाओं के स्वास्थ्य व निर्माण कार्य  में भी सहायता करता है।



स्रोत :


सामान्यतः दालें,नट्स ,खमीर आदि में पाया जाता है। यकृत,अण्डा,माँस,मूँगफली ,सोयाबीन आदि इसके प्रमुख स्रोत हैं। 


  

पेन्टोथेनिक एसिड (Pentothanic Acid)




  पेन्टोथेनिक एसिड 

(Pentothanic Acid)



इसे एंटी डमेंटिटिस फेक्टर (Antidermatitis Factor)भी कहते हैं। 1933 में विलियम्स तथा साथियों द्वारा इस विटामिन को क्रिस्टलीय रूप में प्राप्त किया तथा 1940 में स्टिलर (Stiller)द्वारा संश्लेषित किया गया। प्राणी पोषण में इस विटामिन की उपयोगिता जूक्स तथा होली (Jukes &Woolley)द्वारा स्थापित की गई। 



कार्य :


बच्चों की शारीरिक वृद्धि में सहायक है। यह विटामिन भी को-एन्जाइम COD की भाँति कार्य करता है। शरीर में कार्बोज,प्रोटीन तथा वसा के चयापचय की क्रियाओं में सहायता करता है। 


स्रोत :


सूखे खमीर,यकृत,चावल की ऊपरी पर्त,गेंहूँ का छिलका तथा अंडे के पीले भाग,दूध,शकरकन्द में मुख्य रूप से पाया जाता हैं। 



Friday, 29 May 2015

विटामिन 'बी 6 'या पायरीडॉक्सिन (Vitamin 6 or Pyridoxin)



विटामिन 'बी6 'या पायरीडॉक्सिन 

     (Vitamin 6 or Pyridoxin)




इसे रेट एंटीडमेंटिटिस फेक्टर (Antidermatits Factor)भी कहते है क्योंकि 1934 में गार्गी (Gyorggi)नामक वैज्ञानिक ने चूहों के डमेंटिटी रोग को इस विटामिन को देकर ठीक किया। स्टीलर (Stiller)ने 1939 में इसे संश्लेषित रूप को पायरीडॉक्सिन (Pyridoxin)कहते है। प्रकृति में भी इसके दो रूप होते हैं -पायरीडॉक्सिन (Pyridoxin)तथा पायरीडॉक्ससामीन (Pyridoxamine)इन तीनो रूपों को विटामिन B6 कहते हैं। 


पायरीडॉक्सिन के कार्य :



शरीर में को-एन्जाइम की भाँति कार्य करने वाला विटामिन है। यह नाड़ी संस्थान व लाल रक्त कणिकाओं को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण कार्य करता है। यह ट्रिप्टोफेन अमीनो एसिड को नायसिन में परिवर्तित करने में सहायक हैं। 


पायरीडॉक्सिन प्राप्ति के स्रोत :




सूखी खमीर, गेहूँ के बीजांकुर,माँस,यकृत,दालें,सोयाबीन,मूँगफली,अण्डा,दूध,दही,सलाद के पत्ते,पालक आदि इसके प्रमुख स्रोत हैं।  
   


नायसिन या निकोटिनिक अम्ल(Naicin or Nicotinic Acid)




    नायसिन या निकोटिनिक अम्ल 

     (Naicin or Nicotinic Acid)


इसे निकोटिनिक एसिड,निकोटिनामाइड,नियासिनामाइड आदि नामों से भी संबोधित किया जाता है। इस विटामिन की खोज पैलाग्रा रोग के कारण खोजते समय हुई। सर्वप्रथम अमेरिका के वैज्ञानिक गोल्ड बर्गर (Gold Berger)ने प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया कि कुत्तों में काली जीभ के लक्षण मनुष्य में उत्पन्न पैलाग्रा के समान ही है। पैलाग्रा में व्यक्ति की त्वचा का रंग भद्दा हो जाता है,मस्तिष्क में विकार आने के फलस्वरूप उसकी मृत्यु भी हो सकती है। उसने ज्ञात किया कि भोजन में अमीनो एसिड की न्यूनता ही इस रोग का कारण है। भोजन में खमीर की मात्रा देकर रोग में सुधार देखा गया। खमीर में उपस्थित नायसिन तत्व को पैलाग्रा दूर करने वाला तत्व (Pellagra Preventing Factor or P.P. Factor)नाम दिया गया। 




नायसिन के कार्य :



नायसिन त्वचा,पाचन संस्थान तथा नाड़ी संस्थान की सामान्य क्रियाशीलता के लिए अत्यन्त आवश्यक है। यह दो को-एन्जाइम (NAD,NADP)का निर्माण करती है। यह विटामिन शरीर में ग्लूकोज के अवशोषण व वसा के विखण्डन के फलस्वरूप बने फैटी अम्ल व ग्लिसरॉल के पुनः संगठन में भाग लेता है। शरीर में इसकी उपस्थिति पैलाग्रा से बचाव करती है। 





नायसिन प्राप्ति के स्रोत :


वनस्पति मे:

अनाज,दाल व सूखे मेवों में यह पाया जाता है। मूँगफली में यह बहुतायत में मिलता है। 

जंतुओं में :

सूखा खमीर इसकी प्राप्ति का अनुपम स्रोत है। माँस,व मछली में भी पाया जाता है 

Wednesday, 27 May 2015

विटामिन 'बी ' या राइबोफ्लेविन (riboflavin)



       (विटामिन 'बी ' या  राइबोफ्लेविन )

                   (Riboflavin)


विटामिन 'बी 'की खोज के समय माना गया कि बेरी-बेरी रोग को दूर करने वाला एक ही विटामिन होगा,परन्तु बाद में ज्ञात हुआ कि बेरी-बेरी को दूर करने वाले एक नहीं बल्कि दो विटामिन होते है। एक ताप के प्रति अस्थिर 
(विटामिन 'बी 1')जो बेरी-बेरी को वास्तव में दूर करता है तथा दूसरा ताप के प्रति स्थिर विटामिन 'बी 2'जो चूहों की वृद्धि में सहायक होता है। अन्य प्रयोगो से ज्ञात हुआ कि ताप के प्रति स्थिर विटामिन कई विटामिनों का मिश्रण है। 1932 में  वारबर्ग और क्रिश्चियन ने यीस्ट में से एक से नारंगी पीले रंग के चमकने वाले पदार्थ को अलग किया गया तथा इसे रिबोफ्लेबिन नाम दिया गया। 



राइबोफ्लेबिन के कार्य :



जिस प्रकार थायमिन-कार्बोहाइड्रेट के चयापचय में भाग लेता है उसी प्रकार राइबोफ्लेबिन प्रोटीन,कार्बोहाइड्रेट व वसा के चयापचय में सहायक होता है। राइबोफ्लेबिन नायसिन निर्माण में भी सहायक कार्य करता है। आँख की रेटिना पर्त में स्वतन्त्र रूप से राइबोफ्लेबिन पाया जाता है जो प्रकाश से क्रिया करके आँख की नाड़ी को उत्तेजना प्रदान करती है। राइबोफ्लेबिन की कमी से शरीर की वृद्धि रूक जाना,अशांत स्वभाव व आयु में कमी आदि रूप परिलक्षित होते है। 


राइबोफ्लेबिन प्राप्ति के स्रोत :


राइबोफ्लेबिन विभिन्न वानस्पतिक व जान्तव भोज्यों में उपस्थित रहता है,परन्तु यीस्ट,माँस,मछली,दूध व अनाजों में इसकी अधिक मात्रा पायी जाती है। यह जंतुओं के यकृत में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाता है। अनाज में इस सत्व की मात्रा कम ही होती है। 


                        

विटामिन 'बी 1' या थायमिन (Thiamine)


              (विटामिन 'बी ' काम्पलैक्स )


                             
यह एक विटामिन न होकर कई विटामिनों का समूह है। इन सबको सम्मिलित रूप से 'बी 'काम्पलैक्स कहते हैं। इस समूह के विटामिन निम्न प्रकार है। 



1)- विटामिन 'बी 1' या थायमिन (Thiamine)


थायमिन विटामिन की खोज बेरी -बेरी रोग के उपचार ढूँढ़ते समय हुई।  नेवी के यात्रियों को यह रोग बहुत होता था क्योकिं उनके आहार में शाक -सब्जियों का अभाव होता था। 1885 में इस बीमारी को सर्वप्रथम टकाकी नामक डॉक्टर द्वारा पहचाना गया। उसने उन नेवी के लोगो के आहार में परिवर्तन करके स्थिति में सुधार किया। 1926 में डोनथ व जैक्सन ने चावल की ऊपरी पर्त में से इस विटामिन को पृथक किया जिससे बेरी-बेरी रोग का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। 1931 में विण्डास (windaus)ने विटामिन B1को खमीर से पृथक करके उसकी रचना तथा रासायनिक गुणों पर प्रकाश डाला। गंधक की उपस्थिति के कारण इसका नाम थायमिन रखा। 1930 में विलियम्स ने प्रयोगशाला में विटामिन B1को संश्लेषित किया। 



थायमिन के कार्य :


1)- यह विटामिन कार्बोहाइड्रेट के चयापचय में सहायक होता है। कार्बोहाइट्रेट से ऊर्जा का निर्माण होते समय मध्यवर्ती पदार्थ पिरूबिक एसिड बनता है। यह पिरूबिक एसिड को एसीटेट में परिवर्तित कर देता है तथा आगे की क्रिया में कार्बन डाई-ऑक्साइड का निर्माण करता है। 
2)- पाचन संस्थान की माँसपेशियों की गति को सामान्य रखता है जिससे भूख सामान्य रहती है। 
3)- तन्त्रिका तन्त्र के भली-भाँति कार्य करने में इसकी उपस्थिति अनिवार्य है। 



थायमिन प्राप्ति के स्रोत :


विभिन्न अनाज व दालों के बीजांकुर (germ)खमीर व सूखे मेवे थायमिन प्राप्ति के अच्छे स्रोत हैं। माँस,मछली,अण्डा,दूध व दूध से बने पदार्थों में भी यह विटामिन उचित मात्रा में मिल जाता हैं। 





Wednesday, 20 May 2015

तरबूज का जूस (Watermelon Juice)










तरबूज के फ्रेश जूस में प्रोटीन,कार्बोहाइट्रेट,फाइबर,विटामिन्स,कैल्शियम जैसे मिनरल्स भी मौजूद हैं जो हमारे शरीर को चुस्त दुरस्त रखते है। तरबूज हमारे शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करता है। इसलिए तरबूज का जूस अपने साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों और अपने बच्चों को अवश्य पिलाएँ। 




सर्विंग्स - 4 



सामग्री :

तरबूज (छोटे टुकड़ों में कटा )- 6 कप 
ताज़ी पुदीना पत्ती - 1/2 कप 
चीनी पाउडर - 4 छोटी चम्मच 
नीबू का रस - 4 टेबलस्पून 
काला नमक - 1 छोटी चम्मच 
भुना जीरा पाउडर - 1 छोटी चम्मच 
कुटी बर्फ - 1 कप 




विधि :



1)- ब्लेंडर में तरबूज के टुकड़े,पुदीना पत्ती,चीनी,काला नमक,नीबू का रस और जीरा पाउडर डालकर बारीक़ पीस लें और छन्नी से छान लें। 
2)- चार गिलासों में कुटी बर्फ और छाना हुआ तरबूज का जूस डालें ऊपर से पुदीना पत्ती से सजाएँ। शीघ्र ही ठंडा-ठंडा जूस सर्व करें। 










Monday, 18 May 2015

लेमन एंड जिंजर फ्रेश कप (Lemon and Ginger fresh cup)











आप इस फ्रेश कप को सुबह पिए तो आप अपना वजन कंट्रोल में रख सकते है और अपने आपको तरो-ताजा भी रख सकेगें। 




सर्विंग्स - 1 


सामग्री :



नीबू का रस - 2 छोटी चम्मच 
अदरक का रस - 2 छोटी चम्मच 
शहद - 1 छोटी चम्मच 
काला नमक - 1 पिंच 
ठंडा पानी - 1 कप 




विधि :



1)- सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएँ और ठंडा-ठंडा  नीबू और अदरक फ्रेश कप पिएँ।